जीना यानी हंसने की वजहें तलाशना

हंसी के पल मे आप सोच नही सकतें दिमाग नही चला सकते!
आप सारे दुख, चिंता, तनाव, ईषर्या, अभिमान को छोडकर बस हंसते है!

जिस दिन मनुष्य हंसना भूल जाता है,जिस दिन मनुष्य हंसी- खेलपूर्ण भुल जाता है, जिस दिन मनुष्य नाचना भूल जाता है वह मनुष्य नहीं रह जाता वह अर्थ मानवीय योनियों में गिर गया!

खिलंदडपन उसे हल्का बनाता है,
प्रेम उसे हल्का बनाता हैं ,
हास्य उसे पंख देता है,
हर्षाल्लास से नाचते हुए वह सुदूरतम सितारों को छू सकता है,
वह जीवन के रहस़्यों में प्रवेश पा सकता है!

गम्भीर आदमी हंस नहीं सकता, नाच नही सकता, खेल नहीं सकता, वह निरंतर स्वयं को नियंत्रिण कर रहा है ,
अपना ही जेलर बन गया है! निष्ठावान व्यक्ति निष्ठा से खुशियां मना सकता है ,
नाच सकता है, हंस सकता है! और हंसने में व्यक्ति का शरीर, मन, आत्मा सम्मिलित हो जाते है! खंड विलीन हो जाते है, खंडित व्याक्तित्व खो जाता है!

हास्य तुम्हें वापस उर्जा से भर देता है,
क्या तुमने कभी अपने भीतर इसका निरीक्षण किया है,
जब तुम प्रसन्न होते हो आनंदित होते हो तो कुछ स्रजन करना चाहते हो!

जब तुम दुखी हो और पीड़ित होते हो तुम कुछ नष्ट करना चाहते हो एक ही वाक्य में कहना हो तो मैं कर सकती हूं कि हम मानवता को प्रमदित कर सकें तो तीसरा महायुद्ध नहीं होगा!

Website www.monakhaan.com

Twitter momeenabano

Posted on 26,december,2017

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About mona khaan com

Hi I am Mona Khan. Am a blogger and I write about life,love poetry true story Urdu poems and friendship and also wrote about importance of a girl child in humans life.It was liked by many people.Am looking forward to write more inspirational blogs by which I can give a better shape to the thoughts of our society...