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सुख तो यु़ूं मिलता रहता है.....

Twitter:@Mona_Khaan
Posted on:30.march.2017

जीवन की राह पर सब चलते रहते हैं और शुभ के पल दाएं बाएं से गुजरते रहते हैं मिलो तो मुलाकात हो मिलो तो.....
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First 1 ....
एक अच्छे खास दिख रहे इंसान से भी पूछा कि क्यों भाई सुखी हो?... तो भले ही कुछ पल सोच कर बोले लेकिन किसी न किसी दुख का सुराग ढूंढ ही लाएगा यह नहीं मानेगा कि वह सुखी है !।।।ऐसा लगता है कि सुख सबसे दुर्बल अनुभूति है ऐसा अहसांस है जिसकी तलाश में सब है और जो हमेशा दूसरों के पास ही दिखाई देता है लेकिन क्या यह ख्याल किसी को रहता है कि किसी और के लिए हम भी दूसरे ही तो हैं और उनकी निगाह में सुखी भी! फिर सुखी क्यों नहीं .......
बड़ा दिलचस्प है यह सुख की तलाश का मामला जाने कितने संत ज्ञानी गुरु विचारक और जीवन प्रबंधन विशेषज्ञ इस सवाल का सामना करते हैं सुख कहां पाए ?कोई इस तलाश से परे नहीं जो सतत काम में जुट रहते हैं उनका कहना होता है कि फुर्सत का ना होना सुख है!
जिसके पास काम नहीं है उसकी शिकायत हैं कि काम का ना होना दुख है
सुख कहा मिलता है इस से ज्यादा अहम सवाल है एक ही सुख मिलता कैसे अगर किसी खास शक्ल के सुख की तलाश ना हो तो सच मानिए दिन भर में जाने कितनी बार नए नए रुप में सुख हमारे सामने से गुजरता रहता है कभी सुनाई भी देता है तो कभी महक बंद कर. इर्द गिर्द मंडरा जाता है

जो यकीन ना हो तो गौर कीजिएगा पिछले दिनों में क्या किसी शिशु की किलकारी आपके कानों में नहीं पडी़ ?
या कि आपने किसी गुब्बारे को आसमान की ओर सीना तान कर उड़ते नहीं देखा ?

कभी सर्दी के मौसम में एकाएक मिल गए धुप के टुकड़े का सुख क्या आपके हिस्से में नहीं आया?
या कि  चाय की पहली चुस्की में घुले अदरक स्वाद का सुख नहीं चखा?
गिनते जाए लंबे कम नहीं होंगे फेहरिस्त बढ़ती जाएगी!
यह कहने वाले भी मिलेंगे कि यह सुख कहा है यह तो श्रेणिक आनंद है

तो बताएं स्थायी सुख कौन सा होता है
कोई भाव स्थायी नहीं होता
हर भाव की तरह सूख तुलनात्मक है
तो मानिए की हर तकलीफ क बाद का दौर सुख है किसी भी  इच्छा की पुर्ति सुकुन देती है
चाहे वह सुबह चंद पल की नींद और ले पाने जैसी छोटी इच्छा ही क्यों ना हो

दरअसल हम इत्मिनान के पलों को गिनती में नहीं लेते भूल जाते हैं कि सुख की कामना के साथ ही जुड़ा है आभार का पक्ष

घर लौटते हुए अहसांस का होना ही कोई आपका इंतजार कर रहा!  ( है सुख है )
अाभार की वजह है
इसी तरह दरवाजा बंद करते हुए इत्मीनान रहना कि अपना  कहने को एक घर है
भोजन है! रात भर की नींद नसीब में है
और आपकी फिक्र में फोन करने वाले कुछ अपने जिंदगी में है तो सुख दूर कहां है ?

असल में ना शुक्र होना दुखी रहने का एकलौता कारण है

किसी के पास एक पल का भी चैन ना हो ऐसा कोई इंसान ईश्वर नहीं नहीं रचा!

जिसे पहचान लो वह है!
जिससे पहचान बनाए रखो वो जीवन में बना रहेगा तलवे पर चुभा कांटा दुख है उस पर लगा हल्दी चंदन का लेप सुख है देखने की बात है कि किस के एहसास को कायम रखा जाएगा कांटे के लिए नाराजगी या चंदन का अहसान.......

#मोना

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